मेरा देश मेरी बात !

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*****बुरे फँसे सरकार बना कर*****

Posted On: 6 Feb, 2016 में

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एकांकी [व्यंग्य]
पात्र परिचय:
(1) दिल्ली के मुख्यमंत्री (श्री अरविंद केजरीवाल जी)
(2) दिल्ली के उपमुख्यमंत्री (श्री मनीष सिसोदिया जी)

पर्दा उठता है…………….

10×12 का एक कमरा, कमरे में बहुत ही साधारण सा फर्नीचर लगा है| दीवार पर एक कुछ पुरानी विभागीय व कुछ परिवारिक तस्वीरें टॅंगी हैं, एक अलमारी में अनेक पुस्तकें तरतीब से लगी हैं| साथ ही एक 22″ LCD टी.वी. भी दीवार पर टंगा है| सौफे के एक कोने में दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री जी विराजमान हैं| चेहरे व गर्दन का अधिकांश भाग एक मफ्लर से ढका हुआ है| टी.वी. स्क्रीन पर दिल्ली के विभिन्न भागों की तस्वीरें आ जा रहीं हैं| एक रिपोर्टर हाथ में माइक्रोफ़ोन थामें कुछ कुछ बोल रही है परंतु सुनाई कुछ नहीं दे रहा क्योंकि मुख्य मंत्री जी सुबह से उसकी काएँ काएँ सुन कर पक चुके हैं इसलिए आवाज़ का गला घोंट कर टी. वी. चलता छोड़ दिया है| स्क्रीन पर बार बार कभी कूड़े के अंबार तो कभी भारी ट्रेफिक जाम के दृश्य उभर रहे हैं| मुख्यमंत्री जी बार बार अपना निचला ओंठ दाँतों तले चबाते हैं फिर छोड़ देते हैं| मानों किसी गहन चिंता में हों| उनके सहकर्ता यदि सरकारी कामकाज से ऊब जाते हैं तो छुट्टियाँ मनाने पेरिस, लंदन, या स्विट्ज़रलैंड निकल जाते हैं| मारीशस, सिंगापुर, हांकांग तो छोड़ो जब से सरकार बनाई है, मुख्यमंत्री जी का कश्मीर, मनाली या मुन्नार तक जाना नही हो पाया| छुट्टियाँ मनाने का मन हुआ भी तो एक दो बार खाँसी का इलाज़ करवाने के बहाने बेंगलूरु अवश्य जाना हुआ है| सप्ताहांत तो वैशाली वाले अपने पुराने घर में ही गुज़रता है| कुछ भी हो यहाँ जैसा सुकून कहीं और नहीं | यहाँ आते ही पुराने दिन याद आ जाते हैं| क्या खूब थे वे दिन जब अपने दिल के राजा हुआ करते थे| राजनीति में आने से पहले न घर की चिंता थी न गृहस्थी की, न सरकार की न जनता की| ठीक 28वें दिन सेलरी अकाऊंट में आ जाती थी| छोटे मोटे काम करने को लोग हाथ बाँधे द्वार पर खड़े रहते, नित नई से नई मूवी के पास बिना माँगे घर पर पहुँच जाते| किसी मुशायरे,कवि सम्मेलन अथवा नाटक में शिरकत करना तो आयोजकों पर एहसान करने जैसा होता था| आदमी को और क्या चाहिए ? विचारों का सिलसिला और आगे बढ़ता तभी एक स्वर सुनाई दिया|

आगंतुक:::::::::: [ दिल्ली के वर्तमान उपमुख्यमंत्री जी ] प्रणाम, गुरुजी|

मुख्यमंत्री जी :::::::::: [बिना उस ओर देखे, धीमे स्वर में] आओ मनीष, बैठो|
[पूरा नाम श्री मनीष सिसोदिया, कहने को तो दिल्ली के उपमुख्यमंत्री हैं परंतु मुख्यमंत्री जी के दाएँ हाथ हैं सरकार के काम काज का अधिकतर दारोमदार उपमुख्यमंत्री जी पर है|]

उपमुख्यमंत्री जी :::::::::: इधर से गुजर रहा था सोचा आप से मिलता जाऊं| कुछ डाक और ई मेल भी आए हुए थे जिन पर विचारविमर्श ज़रूरी था| पर देख रहा हूँ आपके दुश्मनों की तबीयत नासाज़ लग रही है कुछ ?

मुख्यमंत्री जी::::::::: [मुस्कुराने का विफल प्रयास करते हुए]
हुम्म्म्म…… आज के दृश्य ने तो वाक्य ही मुझे परेशान कर दिया है|समझ में नहीं आता किया क्या जाए| कभी कभी तो लगता है दोबारा दिल्ली के चुनाव लड़ना हमारी भूल थी| सोचा न था भा.ज.पा. वाले इस कदर दुश्मनी निभाएँगे? उपर बी.जी.पी. नीचे बी.जे.पी. बीच में हम, सैंडविच बना के रख दिया है हमारा | दम घुटने लगा है अब तो| जाने कौन सा मनहूस दिन था जब हमने अपना चुनाव चिह्न झाड़ू रखा था| सोचा था झाड़ू से अंदर और बाहर दोनो की सफाई संभव हो जाएगी| अपने हर मिनिस्टर, नेता, कार्यकर्ता के हाथों झाड़ू थमा के देख लिया| गली गली, घर घर जाकर, भी झाड़ू लगाया पर बी. जे. पी. वालों की वजह से दिल्ली आज फिर कचरा कचरा हो रही है | न जाने इतना कचरा आता कहाँ से है? मुझे तो लगता है आस पास के शहरों से समगल कर के दिल्ली में कूड़ा कचरा लाया जा रहा है| कर्मचारियों की हड़ताल लगता है, हमारी सरकार को लील जाएगी| बीजे हुए MCD के काटने हमें पड़ रहे हैं| ये तो सरासर हमारी छवि खराब करने की साज़िश है|

उपमुख्यमंत्री जी::::::::::: छवि तो हमारी खराब हो ही चुकी है गुरुजी| एक भी तो ऐसा विभाग नहीं बचा जो हमसे खफा न हो| हमें कोई कुछ समझता ही नहीं| जिसके जी में आए हमारे मुँह पे श्याही पोत दे, चाहे तो जूता उच्छाल दे| मुख्यमंत्री न हो गया मानो कोई गली में आवारा घूमता मानसिक रोगी हो| लहू के घूँट पीकर रह जाना पड़ता है| कितने मज़े थे बाबुगिरी में| न दफ़्तर जाने की पाबंदी, न आने की| दफ़्तर गये गये, न गये न गये| दो चार फाइलों पर चिड़ियाँ सी बनाई, दो बार चाय पी, चलो जी अल्ला बेली, अपनी ज़िम्मेदारी ख़त्म| पीछे चाहे आग लगे बस्ती में….अब तो दिल्ली न खुद सोती है न हमें सोने देती है|

मुख्यमंत्री जी:::::::::: तुम खुद ही बताओ मनीष, हम लोग जो भी निर्णय लेते हैं आम लोगों के फ़ायदे के लिए ही लेते हैं न| कोर्ट भी न जाने आजकल पूरी तरह से केंद्र यानी भा.ज.पा. के प्रभाव में है| प्राइवेट स्कूल मेनेजमेंट कोटे के नाम पर कितनी धान्द्लि कर रहे हैं, परंतु कोर्ट को तो हमारी ही नियत में खोट नज़र आती है| मेनेजमेंट कोटा क्या हम अपने लिए ख़त्म करवाना चाहते हैं|
LG साहब हैं तो हमसे शत्रुवत व्यवहार बनाए हुए हैं| कहीं स्कूलों की फीस का झंझट, तो कहीं स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से किसी मासूम की मृत्यु, कोई ख़ुदकुशी करे तो, कोई संपत्ति के लालच में अपने ही माता पिता का कत्ल करे, दिल्ली में प्रदूषण का मामला हो या महिलाओं से दुर्व्यवहार का, कुछ भी हो, ज़िम्मेदार तो है प्रदेश का मुख्यमंत्री ही| तुम्ही बताओ पुलिस बिना भी कहीं प्रसाश्न चलाया जा सकता है भला ? अखिलेश के पास पुलिस है, नीतीश के पास पुलिस है खट्टर की अपनी पुलिस है, नहीं है तो हमारे पास| सरकार बनी है जब से, एक बार भी पुलिस आपसी समन्वय के साथ नहीं चली| पुलिस बिना सरकार, जैसे बिना नाडे का पैजामा | एक हाथ तो पैजामा संभालने में ही व्यस्त रहता है | एक हाथ से सरकार चलाएँ तो कैसे?
उपमुख्यमंत्री जी :::::::::: पुलिस की तो पूछो ही मत| दिल्ली पुलिस हमें तो एँ वें ही समझती है| हमारी कीमत तो दिल्ली पुलिस की नज़र में कुछ है ही नही| होता कोई दूसरा प्रदेश हम दिखलाते क्या होता है प्रदेश का मुख्यमंत्री| हमने तो जनता की भलाई के लिए, दिल्ली पुलिस में हो रहे भ्रष्टाचार को ख़त्म करने की मुहिम चलाई थी वे हैं कि हमारा भी कोई काम नहीं करते| मुझे अपने नज़दीकी रिश्तेदार के लिए रिवाल्वर का लाइसेंस चाहिए था, फाइल ये कह कर वापिस भिजवा दी कि डाक्टरी प्रमाणपत्र लगाओ कि याचिका कर्ता मानसिक रूप से पूर्णतया स्वस्थ है और अपराधिक मनोवृति का नहीं है| बताओ मेरे लिखे की कोई अहमियत ही नहीं|
मुख्यमंत्री जी :::::::::: तो इसमें परेशानी क्या है? डाक्टर से लिखवा कर दे दो!

उपमुख्यमंत्री जी :::::::::: कहाँ गुरुजी, डाक्टर भी तो हम से चिढ़े बैठे हैं| जबसे हमने दिल्ली के सरकारी डाक्टरों पर नज़र रखनी शुरू की है और सभी अस्पतालों में मुफ़्त दवाओं और मुफ़्त टेस्ट होने का एलान किया है| डाक्टर हमारे विरोध में खड़े हो गये हैं| मोटी कमीशन जो मारी जाएगी उनकी | अस्पताल में तो कुछ ही कंपनियों का माल आ पाएगा| अधिकतर कंपनियाँ अपनी दवाएँ महँगे दामों पर बेचती हैं और डाक्टरों को भी उनसे मोटा कमीशन मिलता है| उधर प्राइवेट लैब वाले और डाक्टर दोनो की कमाई में सेंध लगाने का काम कर दिया है हमने | कोई क्योंकर न खफा होगा हमसे | किस किस से लड़ेंगे गुरुजी, हम|

मुख्यमंत्री जी:::::::::: बहुत रोका था अन्ना हज़ारे जी ने तो, अरविंद, कीचड़ में पाँव मत धरो| मुझे ही लगता था कीचड़ को साफ करने के लिए कीचड़ में उतरना ही पड़ेगा| मगर यहाँ तो हर तरफ कीचड़ ही कीचड़ है| जिधर हाथ डालते हैं कालिख अपने मुँह पर ही लग जाती है|जिन लोगों को ईमानदारी की शपथ दिला कर साथ लाए थे वे ही मुँह पर कालिख पोतते बने, और तो और, दिल्ली वासियों के लिए ही तो वातावरण स्वच्छता अभियान चलाया था, उसमें भी कोई सा………, क्या करूँ गुस्से में मुँह से गाली ही निकलती है, चाँदी बनाने से बाज़ नहीं आया| सच ही कहते हैं कांग्रेस वाले हम अभी नौसीखिया हैं| न जाने हमारा हरएक पासा उल्टा ही क्यों पड़ता है| हमने तो चाहा था कि दिल्ली साफ सुथरी हो, स्कूलों,अस्पतालों की सेवाओं में सुधार हो लोगों को सरकार की ओर से अच्छी शिक्षा अच्छे स्वस्थ सुविधाएँ मिलें, पर ये बी.जे.पी. वाले, मानो किसी ने उनकी दुम पे हथौड़ा चला दिया हो| सभी कर्मचारियों के वेतन ही रोक कर बैठ गये हैं और वर्कर्ज़ युनियन्ज को हड़ताल के लिए भड़का दिया ताकि मौका पाकर हमारी सरकार को बदनाम कर सकें|

उपमुख्यमंत्री जी::::::::::: पानी और बिजली वालों को भी हम पहले से ही नाराज़ कर चुके हैं, गुरुजी| दरें कम करने को कहो तो लाख बहाने हैं उनके पास हम ज्वाब तलब करते हैं तो आँखें दिखलाते हैं|
मुख्यमंत्री जी::::::::::: सुन, मनीष, MCD की अपनी भी तो मोटी कमाई है, मैं तो कहता हूँ इनकी भी CBI जाँच करवा दी जाए, सरकारी फंड के गबन में फँसेंगे सब के सब|

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: गबन तो तब होगा न जब फंड होंगे|

मुख्यमंत्री जी:::::::::: क्यों अब तो हर गली नुक्कड़ पर गगनचुंबी इमारतें खड़ी नज़र आती हैं लाखों रुपयों का तो हाऊस टेक्स ही आता होगा|

उपमुख्यमंत्री जी::::::::::: होता है न जमा, टेक्स बनता है डेढ़ लाख, मलिक देता है पचास हज़ार, जमा होता है दस हज़ार| सब जगह बंदर बाँट हो रही है किस किस पर CBI जाँच बैठाओगे गुरुजी|
अरे हाँ जिस काम के लिए आया था वो तो मैं भूल ही गया, किसी सुमित अग्रवाल ने आपके नाम ये ड्राफ्ट भेजा है 364 रुपये का|

मुख्यमंत्री जी::::::::::: हाँ सुना मैने, अभी टी. वी. पर दिखलाया जा रहा था| हमने सा……., अभी डाक खोली नहीं मीडिया को पहले पता चल गया| भेजने से पहले ही उसने मीडिया को खबर कर दी होगी कि ऐसे ऐसे मैं केजरीवाल को जूता मारने जा रहा हूँ| चप्पल पहनना गुनाह हो गया| हमारी तो छोटी से छोटी बात भी पकड़ में आ जाती है, लोग दस दस लाख के सूट पहनते है आलोचना का एक शब्द नहीं निकलता, हमारा दस रुपये का मफ्लर लोगों की आँख की किरकिरी बना हुआ है|

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: इस रकम का क्या किया जाए गुरुजी, मैं तो कहता हूँ आपके लिए एक जोड़ी जूते ले ही लिए जाएँ |

मुख्यमंत्री जी::::::::::: दुनिया खिल्ली उड़ा रही है, तुम एक और सही, जिसे तुम रकम कह रहे हो कौन सी कंपनी के जूते आएँगे इतनी रकम में?

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: आ जाएँगे गुरुजी, आप चलो तो सही पालिका बाज़ार चलते हैं वहाँ मिल जाते हैं अच्छी कंपनियों के सेकेंड हेंड जूते| बिल्कुल पता भी नहीं चलता नये हैं कि पुराने| वहाँ नहीं तो जनपथ पे मिल जाएँगे| मैं तो कहता हूँ चलते हैं|

मुख्यमंत्री जी:::::::::: तुम भी मनीष आज पूरी तरह जले पे नमक छिड़क कर ही मानोगे|

ऐसा करो, इस ड्राफ्ट को फ्रेम करवा के मेरे दफ़्तर में टंगवा दो और भले आदमी को एक लेटर आफ थेन्क्स भिजवा दो और हो सके तो आज की समस्या पर कोई ठोस सा समाधान सुझाओ|

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: गुरुजी बुरा न मानें तो एक बात कहूँ, यहीं पास में ही एक बंगाली बाबा हैं सुना है हर समस्या का हल है उनके पास| मेरे किसी रिश्तेदार ने बताया है कि उनका आज़माया
हुआ है| क्यों न हम भी एक बार आज़मा कर देखें?

मुख्यमंत्री जी::::::::::: यूँ कहो न कि बी. जे. पी. नामक दानव के विरुद्द हमारे पास अभी कोई भी ब्रह्मास्त्र नही| कुछ नहीं मनीष, मुझे तो हाल के घटनाक्रम ने तोड़ कर रख दिया है कहाँ हम बिहार और उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनने के सपने देखने लगे थे कहाँ दिल्ली की गद्दी भी छिनति नज़र आती है| ये बी. जे. पी. वाले हमे कहीं का नहीं छोड़ेंगे|

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: आप भी न गुरुजी, जब भी मीडिया की नज़रों में आते हो जनता को नेगेटिव मेसेज ही देते हो| बिहार में, नीतीश कुमार तक तो ठीक था ये लालू प्रसाद ? मीडिया के सामने ही घुट घुट के गले लगा रहे हो!

मुख्यमंत्री जी:::::::::: तुम भी मनीष, भिगो भिगो कर मारने पे उतर आए हो ! मैने कहाँ लगाया था गले से, वो तो उसने खींच लिया था अपनी ओर|

(फिर गहरी सोच में पड़ जाते हैं)
मुझे तो लगता है फ़रवरी का महीना ही मनहूस है हमारे लिए | ज्यों ज्यों 14 फ़रवरी पास आ रही है मेरा तो दिल बैठा जा रहा है | हॅमारी पहली सरकार भी 14 फ़रवरी 2014 को ही गई थी 2015 में तो मैने शपथ समारोह ही 14 फ़रवरी को रखा था सोचा था बुरा वक्त टल गया परंतु क्या मालूम था फ़रवरी 2016 उससे भी बड़ी मुसीबत लाएगी| किसी तरह से ये तारीख टल जाए| ऐसा न हो एक बार फिर से हमें भगौड़ा करार दे दिया जाए|

उपमुख्यमंत्री जी:::::::::: धीरे बोलिए गुरुजी, मीडिया वालों तक बात पहुँच गई तो हम चाहे सरकार से इस्तीफ़ा दें न दें, मीडिया वाले हमें मजबूर कर देंगे|
पर्दा गिरता है|

दोनो गाने लगते हैं ” इंसान का इंसान से हो भाई चारा, यही पैग़ाम हमारा”

[आलेख व प्रस्तुति भगवान दास मेहंदीरत्ता गुड़गाँव]



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